गुरुवार, 28 नवंबर 2019

21 जनवरी को नहीं बनेगा मानव श्रृंखला।





शराबबंदी और बाल विवाह व दहेजमुक्त विवाह के तर्ज पर जल-जीवन-हरियाली मिशन को लेकर 21 जनवरी, 2020 को प्रस्तावित मानव श्रृंखला की तिथि बदल दी गयी है।

अब यह 19 जनवरी 2020 को आयोजित होगी।शिक्षा विभाग ने बुधवार को इसकी नयी तिथि घोषित की। विभाग के शोध एवं प्रशिक्षण निदेशक विनोदानंद झा ने इसकी पुष्टि की। इससे पहले मंगलवार को मद्यनिषेध दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जल-जीवन-हरियाली को लेकर 21 जनवरी को मानव श्रृंखला आयोजित करने का एलान किया था।

लेकिन 21 जनवरी को मंगलवार पड़ रहा था, जबकि इससे पहले की दोनों ही मानव श्रृंखलाएं रविवार को आयोजित की गयी थीं. इसको देखते हुए इस बार भी प्रस्तावित मानव श्रृंखला की तिथि को दो दिन पहले 19 जनवरी  रविवार को किया गया है।

बुधवार, 27 नवंबर 2019

मध्याह्न भोजन योजना किस श्रेणी में आता है? शैक्षणिक अथवा गैर शैक्षणिक। देखिए विभाग ने क्या दिया जवाब




पटना


सूचना का अधिकार का प्रयोग करके जब विभाग से पूछा गया कि मध्याह्न भोजन योजना किस श्रेणी में आता है? शैक्षणिक अथवा गैर शैक्षणिक।

यदि गैर शैक्षणिक है तो शिक्षकों से या विद्यालय प्रधान से इसकी सेवा किस आधार पर ली जाती है और कब तक ली जाएगी?



न्याययालीय आदेश के बावजूद विद्यालीय प्रधान की जिम्मेदारी से मुक्ति कब तक मिलेगी? और नहीं मिलेगी तो क्यों?



इन सवालो का विभाग ने जवाब देते हुए कहाँ की मध्यान भोजन योजना गैर शैक्षणिक है। और मध्याहन भोजन योजना का सचालन विद्यालय शिक्षा समिति द्वारा किया जाता है प्रधानाध्यापक द्वारा योजना का केवल अनुश्रवण किया जाता है।




सरकार के अड़ियल रवैया से परेशान शिक्षक।




पटना

एनआईओएस से 18 महीने के डीएलएड कोर्स को बिहार सरकार मान्यता दे और ऐसे सभीएनआईओएस से 18 महीने के डीएलएड कोर्स को बिहार सरकार मान्यता दे और ऐसे सभी शिक्षकों को नियोजन में शामिल किया जाए। मणिपुर की तरह बिहार सरकार भी एनआईओएस से प्रशिक्षित शिक्षक को मान्यता दे।

इन मांगों को लेकर शिक्षक मंगलवार को सड़क पर उतरे। इसमें प्रदेशभर के लगभग दो हजार से अधिक शिक्षक शामिल हुए। शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन गांधी मैदान स्थित गांधी मूर्ति से शुरू हुआ। हाथ में बैनर लिये शिक्षक अपनी मांग के साथ गांधी मैदान होते हुए डाक बंगला चौराहे पर आये।


डाक बंगला चौराहे पर शिक्षकों को पुलिस ने रोक दिया। शिक्षकों को आगे नहीं बढ़ने दिया गया। इसके बाद शिक्षक वहीं बैठकर नारेबाजी करने लगे। फिर पुलिस ने शिक्षकों को जबरदस्ती वहां से हटाने की कोशिश की। 


इससे शिक्षक और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। कई शिक्षकों को पुलिस ने बहुत पीटा। इस दौरान झड़प और तेज हो गयी। शिक्षकों के विरोध करने पर कई शिक्षकों को पुलिस ने पकड़ लिया। इनमें इंद्रलोक कुमार, राजकिशोर, अभय कुमार, निर्भय कुमार आदि शिक्षक शामिल थे।

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे एनआईओएस डीएलएड शिक्षक संघ के सूरज गुप्ता ने बताया कि पीएमओ ने डीएलएड को मान्यता दे दी है। इससे मणिपुर राज्य में शिक्षकों को मान्यता दी गयी है। हमें डाक बंगला चौराहे पर रोक दिया गया। पुलिस ने कई शिक्षकों को पीटा है। अगर हमारी मांगें नहीं मानी गयीं तो आंदोलन को और तेज किया जायेगा।


बुधवार, 20 नवंबर 2019

26 नवंबर से स्कूलों के कार्यक्रम में हो रहा है बदलाव।




स्कूलों में संसद बनेगा जहां बच्चे देश के संविधान के विभिन्न पहलुओं को जानेगे और उनसे लोगों को अवगत भी कराएंगे।26 नवंबर संविधान दिवस से इसकी शुरुआत सभी प्राइमरी से लेकर प्लस 2 सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में करनी है। अभियान के तहत अंबेडकर जयंती अप्रैल 2020 तक स्कूलों में विभिन्न गतिविधियां चलानी हैं।

बच्चों से लेकर शिक्षकों, कर्मचारियों को संविधान का महत्व और लोकतांत्रिक व्यवस्था में भारतीय संविधान की विशेषता बताने के लिए सरकार ने छह महीने की विशेष कार्ययोजना बनाई है।

प्राइमरी, मिडिल,हाईस्कूल और प्लस 2 स्कूल के बच्चों के लिए अलग-अलग शेक्षणिक कैलेंडर बनाया गया है। इसमें स्कूली बच्चे मॉक संसद के आयोजन से लेकर जनप्रतिनिधि, वकील से रूबरू होंगे।


डीपीओ समग्र शिक्षा अभियान डॉ.अमरेन्द्र पांडेय ने बताया कि इसके लिए सभी बीईओ को निर्देश दिया गया है। हर महीने का शैक्षणिक कैलेंडर बनाकर दिया गया है। किस महीने कौन सी गतिविधि करानी है, उसे बीईओ स्कूलों में कराएंगे।

इसके तहत प्रार्थना के समय मौलिक कर्तव्य का वाद विवाद, सेमिनार जैसी गतिविधियां होंगी। उद्देश्य है कि बच्चे संविधान के हर पहलू को जान सके।

डीपीओ ने बताया कि हमारे संविधान में 448 अनुच्छेद हैं। इसमें 12 अनुसूचियां, 94 संशोधन और 48 आर्टिकल हैं इसे हिंदी और अंग्रेजी में हाथों से लिखा गया था। इसे बनाने में 2 साल 11 महीने लगे थे। इस प्रयास से इन सारी बातों को बच्चे जानेंगे।

शिक्षकों के मिलने वाले लाभ पर सरकार ने लगाया ग्रहण।



पटना


नियोजित शिक्षकों को ईपीएफ देने के मामले में पटना हाई कोर्ट के फैसले को राज्य सरकार एलपीए के जरिये चुनौती देगी। इस लिए अब एलपीए का फैसला आने तक नियोजित शिक्षकों को इंतजार करना होगा। 

आपको बता दे कि पटना उच्च न्यायालय ने नियोजित शिक्षकों को ईपीएफ के दायरे में लाने का आदेश दिया था। इसक मद्देनजर कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के क्षेत्रीय निदेशक ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इसे लागू करने को कहा था।



जिसके लिए शिक्षा विभाग ने विधि विभाग से परामर्श मांगा था।अब यह तय माना जा रहा है कि इस मामले में राज्य सरकार एलपीए के जरिये हाई कोर्ट में जायेगी। 

आपको बता दे कि हाई कोर्ट का अगला निर्णय आने के बाद ही यह तय हो पायेगा की शिक्षको को ईपीएफ का लाभ मिलेगा या नहीं। 



जब भी शिक्षको के हक में कोई फैसला आता है तब तब ये सरकार कोई न कोई पेच फसा देती है जिससे शिक्षको को मिलने वाला लाभ रुक जाता है। सरकार को शिक्षको को ईपीएफ का लाभ जरूर देना चाहिए।


बिहार के शिक्षको ने अवकाश पर जाने का किया ऐलान।





बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति,बिहार के आह्वान पर 25 नवंबर को प्रस्तावित पटना के सभी विधायक और विधानपार्षद के आवास पर धरना प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए चकाई प्रखंड अध्यक्ष सह जिला महासचिव जयप्रकाश पासवान की अध्यक्षता में कल चकाई प्रखंड के मध्य विद्यालय माधोपुर में शिक्षक संघ की बैठक सम्पन्न हुई ।




बैठक में सभी शिक्षकों ने आकस्मिक अवकाश लेकर सर्वसम्मति से 25 नवंबर की धरना को सफल बनाने का संकल्प लिया। बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष आनंद कौशल ने कहा कि सरकार जब तक शिक्षकों को पूर्ण वेतनमान नही देती है तब तक सरकार के खिलाफ सड़क से सदन तक आक्रामक रूप से लड़ाई जारी रहेगी। 



आज की बैठक में जिलाध्यक्ष रवि कुमार यादव,जिला कोषाध्यक्ष राजीव वर्णवाल,चकाई उपसचिव सुरेश चंद्र यादव,उपाध्यक्ष प्रमोद कुमार,मीडिया प्रभारी बबलू दुबे के साथ अन्य शिक्षक शामिल थे।



मंगलवार, 19 नवंबर 2019

बिहार के नियोजित शिक्षकों के लिए बड़ी खुशखबरी।




बिहार में नियोजित प्रारंभिक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक शिक्षकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर विधि विभाग ने अपनी सहमति दे दी है जिसके बाद अब साढ़े चार लाख नियोजित शिक्षकों को भविष्य निधि (ईपीएफ) का लाभ मिलेगा।




आपको बता दे कि नियोजित शिक्षकों को भविष्य निधि का लाभ देने के लिए शिक्षा विभाग ने तैयारी शुरू कर दी है। शिक्षा विभाग के अनुसार, राज्य के सभी प्रकार के नियोजित शिक्षकों द्वारा ईपीएफ को लेकर पटना हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी। 

याचिका पर सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने सितंबर में राज्य सरकार को सभी नियोजित शिक्षकों को ईपीएफ और एमपी एक्ट-1952 का लाभ देने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने भविष्य निधि कार्यालय के रीजनल पीएफ कमिश्नर को इसकी जिम्मेदारी दी है।




वहीं हाईकोर्ट के आदेश पर पीएफ कमिश्नर ने शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव आरके महाजन को पत्र लिखकर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा था। इसी क्रम में शिक्षा विभाग ने नियोजित शिक्षकों को ईपीएफ की सुविधा देने संबंधी प्रस्ताव भेजकर विधि विभाग से परामर्श मांगा था जिस पर मंजूरी मिल गई है। वहीं अब नियोजित को शिक्षकों ईपीएफ का लाभ मिलेगा।

बिहार के नियोजित शिक्षकों के लिए यह एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर है जो आने वाले समय काफी लाभदायक साबित होगा।

सोमवार, 11 नवंबर 2019

मौलाना अब्दुल कलाम की जीवनी।देखिए एक रिपोर्ट








मौलाना आजाद का जन्म 11 नवंबर, 1888 को मक्का, सऊदी अरब में हुआ था। उनका असल नाम अबुल कलाम गुलाम मोहिउद्दीन अहमद था लेकिन वह मौलाना आजाद के नाम से मशहूर हुए। मौलाना आजाद स्वतंत्रता संग्राम के अहम लीडरों में से एक थे। वह लीडर के साथ-साथ पत्रकार और लेखक भी थे।



उनके पिता का नाम मौलाना सैयद मोहम्मद खैरुद्दीन बिन अहमद अलहुसैनी था। उनके पिता एक विद्वान थे जिन्होंने 12 किताबें लिखी थीं और उनके सैकड़ों शागिर्द (शिष्य) थे। कहा जाता है कि वे इमाम हुसैन के वंश से थे। उनकी मां का नाम शेख आलिया बिंते मोहम्मद था जो शेख मोहम्मद बिन जहर अलवत्र की बेटी थीं।



साल 1890 में उनका परिवार मक्का से कलकत्ता शिफ्ट हो गया था। 13 साल की उम्र में उनकी शादी खदीजा बेगम से हो गई। आइए आज उनकी पैदाइश की सालगिरह पर उनके बारे में कुछ खास बातें जानते हैं...

शिक्षा

आजाद ने अपने परिवार की संस्कृति के मुताबिक पांपरिक इस्लामी शिक्षा हासिल की। पहले उनको घर पर पढ़ाया गया और बाद में उनके पिता ने पढ़ाया। फिर उनके लिए शिक्षक रखे गए। 

आजाद का संबंध एक धार्मिक परिवार से था इसलिए शुरुआत में उन्होंने इस्लामी विषयों का ही अध्ययन किया। उन्होंने कई भाषाओं जैसे उर्दू, हिंदी, फारसी, बंगाली, अरबी और इंग्लिश पर अपनी मजबूत पकड़ बनाई। उन्होंने पश्चिमी दर्शनशास्त्र, इतिहास और समकालीन राजनीतिक का भी अध्य्यन किया। 




उन्होंने अफगानिस्तान, इराक, मिस्र, सीरिया और तुर्की जैसे देशों का सफर किया। पढ़ाई के दिनों में वह काफी प्रतिभाशाली और मजबूत इरादे वाले छात्र थे। अपने छात्र जीवन में ही उन्होंने अपना पुस्तकालय चलाना शुरू कर दिया, एक डिबेटिंग सोसायटी खोला और अपनी उम्र से दोगुने उम्र के छात्रों को पढ़ाया। 16 साल की उम्र में उन्होंने सभी परंपरागत विषयों का अध्ययन पूरा कर लिया था।



शुक्रवार, 8 नवंबर 2019

11 नवंबर को करना स्कूलों के ये काम। पत्र हुवा जारी।





पटना के ज्ञान भवन में तीन दिनों का शिक्षा दिवस कार्यक्रम होगा। 10 नवंबर को राज्य स्तरीय विज्ञान प्रदर्शनी लगेगी। 11 नवंबर को मुख्य कार्यक्रम होगा। गुरुवार को शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव आरके महाजन की अध्यक्षता में शिक्षा दिवस की तैयारी पर बैठक हुई। 


बैठक के बाद विभाग ने पत्र जारी करके स्कूलों को निर्देश दिया है  कि प्रत्येक वर्ष भारत रत्न मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद का जन्म दिन 11 नवम्बर को पूरे राज्य में "शिक्षा दिवस" के रूप में मनाया जाएगा ।



प्रत्येक वर्ष की भाँति इस वर्ष भी इस समारोह का आयोजन सभी विद्यालयों में निम्न प्रकार के कार्यक्रम आयोजित करके किया जाएगा।



सबसे पहले स्कूलों में प्रातः कालीन प्रभात फेरी निकाली  जाएगी। उसके बाद मौलाना अबुल कलाम आजाद के चित्र पर माल्यार्पण किया जाएगा तब फिर विद्यार्थियों के बीच मौलाना अबुल कलाम आजाद की जीवनी की विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला जाएगा

विभागीय पत्र