सोमवार, 3 दिसंबर 2018

टोला सेवको को सरकार दे रही है ये उपाधी।



राज्य के महादलित अतिपिछड़े व अल्पसंख्यक बच्चों को मुख्यमंत्री अक्षर आंचल योजना के तहत तराश रहे करीब 28 हजार शिक्षा सेवकों को अगले दो माह में शिक्षा विभाग प्रशिक्षित करेगा।



टोला सेवक व तालीमी मरकज के शिक्षा सेवी अब शिक्षा सेवक के नाम से जाने जाते हैं। शिक्षा विभाग इन सेवकों को सामाजिक अग्रदूत बनाने की तैयारी में है। जनशिक्षा निदेशालय ने यूनिसेफ के साथ मिलकर इस सभी शिक्षा सेवकों के प्रशिक्षण का माड्यूल तैयार किया है।


प्रशिक्षण में प्रथम,डेवेनेट जैसी शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाली संस्थाओं के प्रशिक्षकों का सहयोग लिया जाएगा। गर्मी की छुट्टियों के बाद ही 28 हजार शिक्षा सेवकों के प्रशिक्षण की तैयारी थी। इसको लेकर जनशिक्षा निदेशालय ने यूनिसेफ के साथ मिलकर ट्रेनिंग माड्यूल न सिर्फ तैयार किया बल्कि जहानाबाद और किशनगंज के चुनिंदा इलाकों में इस मॉडल का परीक्षण कर उसमें जरूरी संशोधन भी किये। 

पिछले एक-डेढ़ माह के दौरान राज्यभर के प्रखंडों में कार्यरत मुख्य साधन सेवियों (केआरपी ) की अलग-अलग टोलियों की ट्रेनिंग राजधानी में संपन्न हुई। इन प्रशिक्षणों के माध्यम से मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए। 



जनशिक्षा निदेशक विनोदानंद झा ने रविवार को बताया कि जल्द ही अब जिला मुख्यालयों में शिक्षा सेवकों के लिए चारदिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आरंभ किये जाएंगे।


एक साथ 40-45 शिक्षा सेवकों को प्रशिक्षित करने की तैयारी है। फरवरी माह तक सभी 28 हजार लोगों को प्रशिक्षित कर दिया। जाएगा। टोला सेवकों व शिक्षा सेवियों की नियुक्ति के बाद से अबतक कोई ट्रेनिंग नहीं हुई थी, इस लिहाज से यह प्रशिक्षण महत्वपूर्ण होगा।



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