सोमवार, 17 दिसंबर 2018

शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया में देरी पर सरकार ने दिया जवाब।


पटना


मौजूदा शैक्षणिक सत्र में भी प्रदेश के माध्यमिक-उच्च माध्यमिक विद्यालयोंमें शिक्षकों की नियुक्ति की उम्मीद नहीं है।मौजूदा स्थिति यह है कि बिहार के इन कोटि के सरकारी विद्यालयों में 30 हजारसे अधिक शिक्षकों के पदरिक्त हैंदूसरी तरफ राज्य सरकार नियुक्ति करने की स्थिति में ही नहीं है, क्योंकि उसके हाथ बंधे हैं।





राज्य में वर्ष 2006 से लागू बिहार शिक्षक नियोजन नियमावली का वह दोनों प्रावधान ही विलोपित हो गयाहै, जिनके तहत नियुक्तियां होतीं थी। इसलिए उधार के शिक्षकों से ही जैसे तैसे कक्षा चलाने की कोशिश हो रही है।





गौरतलब है कि वर्ष 2016-17 में सरकारी हाईस्कूल व प्लसटू में पांचवें चरण का शिक्षक नियोजन चल रहा था। इसी बीच नियोजित शिक्षकों के वेतनमान मामले में सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने 31 अक्टूबर 2011 को समान काम के बदले समानवेतन का आदेश दे दिया।





साथ ही कोर्ट ने नियोजन नियमावली के दो प्रावधानों को भी विलोपित कर दिया। हाईकोर्ट के इस आदेश के खिलाफ राज्य सरकार ने दिसम्बर 2017 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की। 29 जनवरी 2018 को इस मामले की पहली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में हुई और 3 अक्टूबर तक 25-26 तारीखों के बाद फिलहाल फैसला सुरक्षित रखा गया है।





मौजूदा पूरा साल इसी कवायद में गुजर गया। अब सरकार की नजर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी है। शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा भी कई बार कह चुके हैं कि कोर्टका फैसला आने के बाद ही शिक्षकों की की कवायद शुरू की जा सकती है।


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