सोमवार, 12 नवंबर 2018

शिक्षकों को नौकरी से हटाने के लिए बिहार सरकार ने गठित की कमिटी।


पटना 


31 मार्च 2019 तक राज्य के विद्यालयों में कार्यरत जो शिक्षक प्रशिक्षण नहीं ले रहे है अगले दिन से स्वत: ही उनकी सेवा समाप्त हो जाएगी। 



यह आदेश सरकारी और निजी दोनों तरह के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों पर समान रूप से लागू होगा। शिक्षकों को डिप्लोमाइनएलिमेन्ट्र एजुकेशन (डीईएलएड) की डिग्री अनिवार्य है। केन्द्र सरकार ने इसे सख्ती से लागू करने के लिए सभी राज्य सरकारों को पत्र भेजा है।

बिहार सरकार ने केन्द्र सरकार के इस आदेश पर अमल के लिए शिक्षा सचिव आर एल चोंगथु की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित कर दी है।



कमेटी में प्राथमिक शिक्षा के सचिव को समन्वयक का जिम्मा दिया गया है। इसके अलावा शिक्षा विभाग के शोघ एवं प्रशिक्षण निदेशक तथा प्राथमिक शिक्षा निदेशक को कमेटीका सदस्य बनाया गया है। 

समन्वयक के जिम्मे प्रशिक्षण देने वाली एजेंसियों के साथ तालमेल कर कार्यरत शिक्षकों को ट्रेनिंग दिलाने वाले संस्थानों से तालमेल बैठाने का जिम्मा भी दिया गया है। 



इस आदेश को किस प्रकार प्रदेश में लागू किया जाए इसको लेकर शिक्षा सचिव की अध्यक्षता में एक बैठक भी हुई जिसमें आगे की कार्य योजना बनी। बैठक में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) के निदेशक संजय कुमार सिन्हा भी थे।




आपको बता दे कि जानकारी के मुताबिक राज्य में करीब 73 हजार अप्रशिक्षित शिक्षक हैं। इनमें 33 हजार निजी विद्यालयों के, जबकि करीब 40 हजार शिक्षक सरकारी विद्यालयों के हैं।




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