शुक्रवार, 23 नवंबर 2018

विश्व स्तर पर भारत की शिक्षा स्तिथि सबसे घटिया। देखिए एक रिपोर्ट




वाशिंगटन। 



विश्व बैंक ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि भारत 'घटिया' शिक्षा वाली 12 देशों की सूची में दूसरे स्थान पर है जहां दूसरी कक्षा के बच्चे छोटे से पाठ का एक शब्द भी नहीं पढ़ पाते हैं। 



रिपोर्ट के मुताबिक, 12 देशों की इस सूची में मलावी पहले स्थान पर है। भारत समेत निम्न और मध्यम आय वाले देशों में अपने अध्ययन के निष्कर्षों का हवाला देते हुए विश्व बैंक ने चेतावनी दी है कि बिना सिखाये जाने (लर्निग) के स्कूली शिक्षा विकास के अवसर को खत्म कर देती है। 



ऐसी शिक्षा बच्चों और युवाओं के साथ अन्याय है। बैंक ने 'डेवलपमेंट रिपोर्ट 2018 : लर्निग टू रियलाइज एजुकेशन्स प्रॉमिसनाम की यह रिपोर्ट मंगलवार को जारी की थी। रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण भारत में तीसरी कथा के तीन चौथाई छात्र दो अंकों का घटाव तक हल नहीं कर सकते हैं। यही नहीं पांचवीं के आधे छात्र भी ऐसा नहीं कर पाते हैं। 


रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2016 में ग्रामीण भारत में पांचवीं कक्षा के केवल आधे छात्र ही दूसरी कक्षा के स्तर की आसान किताब अच्छे से पढ़ सकते हैं। वर्ष 2010 में आंध्र प्रदेश में पांचवीं कथा के वह छात्र पहली कक्षा के सवाल का सही जवाब नहीं दे पाए, जिनका परीक्षा मेंप्रदर्शन अच्छा नहीं था।



इतना ही नहीं पांचवी कक्षा के औसत छात्रों के लिय यह संभावना महज 50 फीसदी थी। ठोस कदम की सिफारिश रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षा की बदहाली के कारण स्कूल में कई वर्ष बाद भी लाखों बच्चे पढ़लिख नहीं पाते, यहां तक कि गणित का। आसान-सा सवाल तक हल नहीं कर पाते।

रिपोर्ट में 'ज्ञान के संकट' को हल करने के लिए विकासशील देशों की मदद करने के लिए ठोस नीतिगत कदम उठाने की भी सिफारिश की गई है। 


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