सोमवार, 1 अक्तूबर 2018

सरकार के गलत नीति से अनट्रेंड शिक्षक कर रहे है शिक्षको को ट्रेंड।



खुद ट्रेनिंग नहीं ली, पर दूसरों को ले ट्रेनिंग दे रहे हैं। जी हां, राज्य के सरकारी प्रशिक्षण महाविद्यालयों का यही हाल है।2012 में खुले प्रशिक्षण महाविद्यालयों में छह साल बाद भी अभी व्याख्याता नियुक्ति की प्रक्रिया ही चल रही है।

एक साल पहले इनमें अतिथि व्याख्याता रखे भी गए तो इनमें भी सभी प्रशिक्षित नहीं हैं। राज्य भर में 66 सरकारी प्रशिक्षण या महाविद्यालय हैं।


इनमें छह में बीएड और 60 में डीएलएड कोर्स चलता है। एनसीटीई मानक के अनुसार 50 प्रशिक्षुओं पर आठ व्याख्याता होने चाहिए। लेकिन इनमें से किसी में भी मानक के अनुसार व्याख्याता नहीं हैं।




2017 में छह सौ अतिथि शिक्षक व्याख्याता के रूप में रखे गए लेकिन इनमें कई अनट्रेंड ही हैं, यानी ज्यादातर के पास मानक के अनुसार डिग्री नहीं हैं।


आपको बता दे कि ज्यादातर प्रशिक्षण महाविद्यालयों में व्याख्याता की कमी है। सभी महाविद्यालयों में 2006 और 2007 के अनट्रेड शिक्षक ही अब तक पढ़ा रहे हैं।


ऐसे में 2011 में पास अनट्रेंड टीईटी और एसटीईटी अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण भी अप्रशिक्षित शिक्षकों के जरिये ही मिला। इन अभ्यर्थियों को डीएलएड कोर्स की ट्रेनिंग तीन सत्रों में कराई गई थी।



बहरहाल 2018 में जा कर बहाली की प्रक्रिया शुरू हुई है आशा है कि जल्द सभी जगह खाली सीटो को भर दिया जाएगा।




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