मंगलवार, 14 अगस्त 2018

आखिर क्यों 15 अगस्त को ही मिली आजादी?



आखिर क्यों 15 अगस्त को ही मिली आजादी ?


15 अगस्त, 2018 को भारत अपना 72 वां स्वतंत्रता दिवस मनाने जा रहा है। यूं तो देश में प्रतिदिन कोई ना कोई त्यौहार मनाया जाता है लेकिन स्वतंत्रता दिवस की बात ही कुछ निराली है।
यह बात तो सभी जानते हैं कि इस दिन भारत ने खुद को अंग्रेजी सरकार की गुलामी से आजाद कर अपना स्वराज हासिल किया था। लेकिन इस दिन से जुड़े कई ऐसे तथ्य भी हैं जिनसे अभी तक बहुत से लोग अनजान हैं।


हमें 15 अगस्त को ही आजाद क्यों किया गया?

आजाद भारत के तिरंगे का इतिहास आदि कुछ ऐसी बातें हैं जिन्हें हम आपके समक्ष प्रस्तुत करने जा रहे हैं:

1. भारत को किसी भी दिन आजाद किया जा सकता था लेकिन भारत में अंग्रेजी सरकार के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने देश को 15 अगस्त को ही आजाद घोषित करने का निश्चय इसलिए किया क्योंकि इसी दिन ठीक दो वर्ष पहले यानि 15 अगस्त, 1945 को जापान ने खुद को मित्र देशों के सामने समर्पित किया था।

2. वर्ष 1947 की शुरुआत में ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री क्लीमेंट एटली ने यह निर्धारित किया था कि भारत को जून 1948 से पहले स्वतंत्र कर दिया जाएगा। लेकिन महात्मा गांधी के सत्याग्रह आंदोलन के चलते अंग्रेजी हुकूमत को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा जिसके चलते उन्होंने देश को जल्द आजाद कर दिया।

3. भारत विभाजन के बाद नव निर्वाचित और भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड लुइस माउंटबेटन को दोनों देशों भारत व पाकिस्तान में होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लेना था। ऐसे में किसी भी तरह की असुविधा से बचने के लिए 14 अगस्त को पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस घोषित किया गया और भारत को 15 अगस्त के दिन आजाद किया गया।

4. भारत को स्वतंत्रता दिलवाने में महात्मा गांधी का बेहद महत्वपूर्ण योगदान रहा। लेकिन क्या आप जानते हैं कि महात्मा गांधी को किसने प्रभावित किया था। लेखक डेविड थोरो ने अपनी एक किताब में यह बात लिखी थी लोगों को टैक्स नहीं देने चाहिए और सरकार के साथ किसी भी प्रकार का सहयोग नहीं करना चाहिए। इसके बाद महात्मा गांधी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार और नमक पर लगने वाले कर का विरोध करने जैसे आंदोलन किए।

5. भारत की आजादी के बाद तक जम्मू-कश्मीर रियासत के सरदार इस बात का निर्णय नहीं ले पा रहे थे कि उन्हें भारत के साथ मिलना चाहिए या पाकिस्तान के साथ। पाकिस्तान का मानना था कि प्रदेश की अधिकांश जनसंख्या मुसलमान है इसीलिए उन्हें पाकिस्तान के साथ मिलना चाहिए लेकिन अंतत: अक्टूबर 1947 में जम्मू-कश्मीर रियासत के सरदार ने अपनी रियासत को भारत का हिस्सा बनाने पर अपनी रजामंदी दे दी।

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